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देश संविधान और लोकतंत्र से चलेगा या CJP के चाबुक से? गिरफ्तारी रोकने के आदेश के क्या हैं मायने?

Updated on 28-07-2026 04:32 PM
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की सारी मांगें सरकार ने मान ली हैं. सरकार ने उन पर अमल भी शुरू कर दिया है. सीजेपी की पहली और बड़ी मांग थी कि धर्मेंद्र प्रधान मंत्री पद से इस्तीफा दे. दूसरी मांग थी कि आंदोलकारी युवाओं पर मुकदमे दर्ज न हों और जो दर्ज हो चुके हैं, उन्हें वापस लिया जाए. तीसरी मांग NEET के उन अभ्यर्थियों के परिवार को 10000000 रुपए मुआवजा देने की थी, जिन्होंने प्रश्न पत्र लीक होने की वजह से जान गंवा दी. 1 मांग से शुरू हुआ CJP का आंदोलन 3 मांगों तक ही सीमित नहीं रहा. शिक्षा-परीक्षा में सुधार के लिए 5 सूत्री मांगों की एक और फेहरिस्त सीजेपी के शीर्षस्थ नेताओं ने सरकार को थमा दी. सरकार ने उसे भी स्वीकार कर लिया.
इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक्सपर्ट की कमेटी बनाई है और पेपर लीक रोकने के लिए संसद में सजा के सख्त प्रावधानों वाला बिल भी पेश कर दिया है. आंदोलन अब खत्म हो चुका है. इसकी घोषणा खुद अभिजीत दीपके और सौरभ दास ने सरकार के नुमाइंदों के साथ संवाददाता सम्मेलन में की. ऊपर-ऊपर साब कुछ शांत दिख रहा है. पर, सीजेपी के सोशल मीडिया मैसेज से यह नहीं लगता कि आग अभी ठंडी हुई है. हालांकि CJP नेताओं की शिकायत पर सरकार ने संज्ञान भी ले लिया है. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो शांतिपूर्वक प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई नहीं होगी.
सीजेपी की मांग थी कि दिल्ली के जंतर-मंतर के प्रदर्शनकारियों के अलावा भाजपा शासित राज्यों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले दर्ज न हों. पर, बंगाल और बिहार में प्रदर्शनकारियों की जमात में कई ऐसे लोग चिह्नित हुए हैं, जो सीसीटीवी कैमरों जैसे पुलिस के निगरानी के उपकरणों में पत्थर फेंकते, हमला करते या तोड़-फोड़ करते दिखे थे. बिहार-बंगाल में इनकी गिरप्तारियां हो रही थीं. इसे लेकर सीजेपी के X हैंडल से लगातार मैसेज फ्लोट हो रहे. चेतावनी दी गई कि सरकार से हुई वार्ता के मुताबिक ततत्काल अरेस्टिंग प्रक्रिया रोकें. ऐसा न करने पर दोबारा आंदोलन की चेतावनी भी दी गई. बिहार ने तो गिरफ्तारी रोकने और अब तक पकड़े गए लोगों को रिहा करने का निर्णय ले लिया है, लेकिन बंगाल सरकार ने अभी तक इस तरह का फैसला नहीं किया है. अब देखना दिलचस्प होगा कि सरकार CJP के आगे फिर झुकती है या प्रदर्शनकारियों में शामिल होकर अराजकता फैलाने वाले तत्वों के साथ अपराधी जैसा बर्ताव करती

बिहार में 2500 को बनाया गया था अज्ञात आरोपी

बिहार में 268 लोगों को नामजद और 2500 को अज्ञात आरोपी बनाया गया था. करीब 700 लोग पकड़े भी जा चुके थे. सीसीटीवी कैमरों और वीडियो रिकार्डिंग के आधार पर इनकी पहचान अराजकता फैलाने वाले लोगों में की गई थी. जनशक्ति जनता पार्टी के प्रमुख तेज प्रताप यादव तेज प्रताप यादव और लेफ्ट विधायक संदीप सौरभ को भी गिरफ्तार किया गया है. प्रदर्शन के दौरान अराजक तत्वों ने सारण जिले के एक बीडीओ की आंख को नुकसान पहुंचाया तो कई एसपी भी चोटिल हुए. बिहार पुलिस मुख्यालय के मुताबिक NEET पेपर लीक के खिलाफ 25 जुलाई को हुए छात्र आंदोलन और बिहार बंद के दौरान 91 पुलिस अधिकारी और सुरक्षाकर्मी जख्मी हुए हैं. सीवान और सीतामढ़ी के एसपी के अलावा कई एसडीपीओ भी अराजक तत्वों का शिकार बने हैं.

पुलिस किस मुंह से अपराधियों पर अपना रौब झाड़ेगी?

सबसे बड़ा सवाल अब उठता है कि कॉकरोच जनता पार्टी आंदोलनकारी किसे मानती है. क्या गैर छात्र और पेशेवर अपराधी, जो प्रदर्शनकारियों में शामिल थे, उन्हें भी क्या सीजेपी आंदोलनकारी मानेगी? ज्वाइंट प्रेस कान्फ्रेंस में यह बात साफ नहीं हुई थी. अब सीजेपी ने राज्यों में चल रही गिरफ्तारियां रोकने का फरमान सुनाया है. इसे लेकर बिहार के सीएम सम्राट चौधरी को X पर मैसेज भी सीजेपी ने दिया था. राज्य सरकारों ने अगर इस पर अमल करते हुए गिरफ्तारियां रोक दीं तो पुलिस किस मुंह से अपराधियों पर अपना रौब झाड़ेगी?

अब गेंद कॉकरोच जनता पार्टी के पाले में

सरकार ने सीजेपी (CJP) की सारी मांगें मान कर ईमानदारी का परिचय दिया है. अब गेंद सीजेपी के पाले में है. उसे अब यह बताना होगा कि वह अराजक तत्वों के साथ है या खिलाफ. यह तय करना आसान नहीं होगा. यह पहचान इसलिए जरूरी है कि जिस सीजेपी की ओर जनता आशा भरी नजरों से देख रही है, उनके और मौजूदा दौर की इससे तुलना भी आसान हो जाएगी. यह उस सूत्र का संकेत भी होगा कि देश संविधान और लोकतांत्रिक तरीके से चलेगा या चाबुक से. दिल्ली पुलिस भी दुविधा में है. अभी तक सरकार की ओर से उसे गिरफ्तारी रोकने का कोई आदेश नहीं मिला है. दिल्ली पुलिस ने कई ऐसे मामले दर्ज किए हैं, जिनमें गिरफ्तारी रोकना आसान नहीं होगा. पत्रकारों के साथ मारपीट के जो केस दर्ज हुए हैं, उसमें क्या होगा, यह बड़ा सवाल है. हालांकि दिल्ली पुलिस ने कहा है कि पत्रकारों के मामलों में कार्रवाई रोकी नहीं जा सकती.

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