50 साल पुराना वो दर्द, जब UNSC में पाकिस्तान से हार गया भारत, लेकिन अब 360 डिग्री पर घूम गया समय का पहिया
Updated on
14-07-2026 03:32 PM
इस वक्त भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अपनी दावेदारी मजबूत करने जा रहा है, जो बदलते हुए वैश्विक परिदृश्य और राजनीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है. जब दुनिया पश्चिम एशिया तनाव और यूक्रेन युद्ध से जूझ रही है, भारत ने 2028-29 के लिए UNSC के अस्थायी सदस्य पद का चुनाव अभियान आधिकारिक रूप से लॉन्च कर दिया है. साउथ एशिया की अहम धुरी बन चुका भारत आज एक मजबूर स्थिति में है, लेकिन 70 के दशक का वो दौर भी था, जब भारत को पाकिस्तानी कूटनीति के आगे हार माननी पड़ गई थी. दिसंबर 1971 की जीत के बाद भारत, दक्षिण एशिया का बड़ा खिलाड़ी बन चुका था. बांग्लादेश का बनना, पाकिस्तान की सेना की शर्मनाक हार और वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती आवाज ने ये उम्मीद पैदा कर दी थी कि अब भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भी कम से कम प्रभावी अस्थायी स्थान बना लेगा पर हुआ कुछ अलग ही.
1975 में, जब UN जनरल असेंबली ने 1976-77 के लिए नॉन-परमानेंट सदस्य चुनने की प्रक्रिया शुरू की, तो एशियाई ग्रुप की एक सीट पर फिर भारत और पाकिस्तान के बीच सीधी टक्कर हो गई. यहां नतीजा अलग रहा और भारत को रणनीतिक पीछे हटना पड़ा. पाकिस्तान ने उस वक्त ये सीट हासिल कर ली और यह घटना आज भी भारत की कूटनीतिक यादों में एक महत्वपूर्ण सबक के रूप में दर्ज है. खासकर जब भारत 2028-29 के लिए UNSC नॉन-परमानेंट सदस्यता और उसके साथ आने वाली अस्थायी प्रेसिडेंसी के लिए कैंपेन चला रहा है, तो भारत की ये चूक भूली नहीं जा सकती है. हम यूएनएससी की अस्थायी सदस्यता की ओर जैसे ही देखते हैं, तो 1975 की ये जियोपॉलिटिक्स जेहन में ताजा हो जाती है.
क्या थे 1975 के हालात?
1971 की जंग के बाद पाकिस्तान टूटा हुआ और अपमानित महसूस कर रहा था. उसके पास परमाणु कार्यक्रम की दिशा में तेजी आई, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समर्थन सीमित था. वहीं भारत, इंदिरा गांधी के नेतृत्व में नॉन अलाइड मूवमेंट (NAM) में सक्रिय था और विकासशील देशों का चैंपियन बनने की कोशिश कर रहा था. UNSC में अस्थायी सदस्यता के लिए चुनाव हर दो साल में होते हैं. एशिया-पैसिफिक ग्रुप को आमतौर पर दो सीटें मिलती हैं, जिनमें से एक अरब या मुस्लिम देशों और दूसरी अन्य एशियाई देशों के बीच घूमती रहती है. 1975 में, मौजूदा सदस्यों में इराक का कार्यकाल खत्म हो रहा था. जनरल असेंबली के 30वें सत्र में 20-23 अक्टूबर को मतदान हुआ. अन्य क्षेत्रों की सीटें (अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, पूर्वी यूरोप) पहले ही तय हो चुकी थीं – बेनिन, लीबिया, पनामा और रोमानिया आसानी से चुने गए. अब बची सिर्फ एशियाई सीट, जहां भारत और पाकिस्तान मुख्य दावेदार थे. फिलीपींस ने भी शुरुआत में दावा किया लेकिन बाद में पीछे हट गया.
इसके लिए चुनाव की प्रक्रिया सरल नहीं थी, जिसमें कुल 8 राउंड हुए. UNGA में दो-तिहाई बहुमत जरूरी था, यानि कुल 140 से ज्यादा सदस्यों में से लगभग 93-94 वोट्स जरूरी थे. पहले राउंड में रोमानिया, दहोमे, पनामा और लीबिया आसानी से चुने गए. एशियाई सीट पर भारत को 60 वोट मिले, पाकिस्तान को 59, फिलीपींस को भी कुछ वोट मिले, जो पर्याप्त नहीं थे. फिर अगले राउंड्स में भी वोटिंग जारी रही. भारत और पाकिस्तान के बीच वोटों का अंतर करीब 10-20 का रहा. कुल 8 राउंड मतदान होने के बाद 23 अक्टूबर तक प्रक्रिया जारी रही. इस दौरान कूटनीतिक गतिविधियां भी चल रही थीं. कई देशों के प्रतिनिधियों ने अपील की कि एक देश पीछे हट जाए ताकि सहमति बन सके. कुवैत के प्रतिनिधि ने खासतौर पर अपील की और भविष्य में समर्थन का आश्वासन दिया. मिस्र, ईरान, अल्जीरिया, ईराक, थाईलैंड, मॉरिशस और अर्जेंटीना जैसे देशों ने भी यही अपील दोहराई और आखिरकार भारत के स्थायी प्रतिनिधि जयपाल ने नाम वापस ले लिया. उन्होंने कहा कि भारत भविष्य के चुनाव में समर्थन की उम्मीद रखता है. इस पर पाकिस्तान के प्रतिनिधि अखुंद ने भारत का शुक्रिया अदा किया और भविष्य में समर्थन का वादा किया. इस तरह आखिरी राउंड में पाकिस्तान को 123 वोट मिले और वह निर्विरोध चुना गया.
अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि इसराइल अमेरिका का एक अच्छा पार्टनर और सहयोगी देश है, लेकिन दोस्तों के बीच मतभेद भी रह सकते हैं.फ़ॉक्स न्यूज़ को…
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीति एक बार फिर कानूनी विवाद में फंस गई है. अमेरिका के 25 डेमोक्रेटिक शासित राज्यों ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ अदालत…
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में कोहराम मचा है। पाकिस्तान सरकार चुनाव करवाने की नौटंकी जरूर कर रही है, लेकिन हकीकत ये है कि फील्ड मार्शल असीम मुनीर के…
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ़िलहाल ईरान पर अपने संभावित हमले को रोकने का एलान किया है.वेबसाइट एक्सियोस की रिपोर्ट में दावा किया गया है इससे पहले उन्होंने सऊदी…
मोरक्को से स्पेन के उत्तरी अफ़्रीकी एन्क्लेव स्यूटा में पिछले एक हफ़्ते में हज़ारों प्रवासी पहुँचे हैं. यह बात उस क्षेत्र के एक नेता ने कही है.जुआन जीसस विवाज़ ने…