सुकमा में निर्दोष आदिवासियों की रिहाई की मांग तेज, कांग्रेस ने पीड़ित परिवारों का सुना दर्द; जिला मुख्यालय पहुंची भीड़
Updated on
18-07-2026 09:49 PM
नक्सल मामलों में वर्षों से जेल में बंद बताए जा रहे निर्दोष आदिवासियों की रिहाई की मांग अब सुकमा जिले में तेज होती दिखाई दे रही है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस जिलाध्यक्ष हरीश कवासी ने तिम्मापुरम सहित प्रभावित गांवों का दौरा किया और जेल में बंद लोगों के परिजनों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। परिवारों की पीड़ा सुनने के बाद उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि कोई व्यक्ति निर्दोष है तो उसे न्याय दिलाने के लिए कांग्रेस हर स्तर पर आवाज उठाएगी।
परिजनों ने सुनाई संघर्ष और इंतजार की कहानी
तिम्मापुरम गांव की सोनमती यादव ने बताया कि उनके पति नंगा पिछले साढ़े तीन वर्षों से जेल में बंद हैं। पति की अनुपस्थिति में दो छोटे बच्चों की पूरी जिम्मेदारी उन पर आ गई है। उन्होंने बताया कि कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए परिवार की गाय और बकरियां बेचकर 25 हजार रुपये वकील को दिए, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल सका।
इसी गांव के माड़वी दिनेश ने कहा कि उनके पिता माड़वी हूंगा पिछले दो वर्षों से जेल में हैं। उनके अनुसार, उनके पिता स्वयं सरेंडर करने पहुंचे थे, लेकिन बाद में उन्हें चिंतलनार ले जाकर जेल भेज दिया गया।
आर्थिक और मानसिक संकट से जूझ रहे परिवार
वेट्टी हूँगी ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि करीब तीन वर्ष पहले उनके पति वेट्टी लखमा और बेटे वेट्टी रेनू को एक साथ घर से ले जाया गया था। परिवार ने धान बेचकर अब तक 40 हजार रुपये वकीलों की फीस पर खर्च किए हैं, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। उन्होंने बताया कि बेटे की शादी के महज दस दिन बाद ही उसे हिरासत में ले जाया गया था और उसकी पत्नी आज भी उसके लौटने का इंतजार कर रही है।
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