होर्मुज से गुजरा भारत से UAE जा रहा जहाज, अमेरिकी नाकेबंदी के बाद पहला पास
Updated on
14-04-2026 01:27 PM
पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. यूनाइटेड स्टेट्स और ईरान के बीच पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता बेनतीजा खत्म हो गई, जबकि पहले युद्धविराम की घोषणा की गई थी. इस असफल बातचीत के बाद हालात और बिगड़ते नजर आ रहे हैं. वार्ता फेल होने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा कदम उठाते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान के बंदरगाहों पर नौसैनिक घेराबंदी लागू कर दी. ट्रंप ने साफ कहा कि हम किसी देश को दुनिया को ब्लैकमेल या डराने नहीं देंगे.उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर ईरान की कोई तेज हमला करने वाली नौकाएं अमेरिकी सेना के करीब आईं, तो उन्हें तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा.
हिज्बुल्ला का ऐलान
हालांकि ट्रंप ने यह भी दावा किया कि बातचीत विफल होने के बाद ईरान के प्रतिनिधियों ने फिर से संपर्क किया है और अब तेहरान शांति समझौते के लिए बातचीत में लौटना चाहता है. इस बीच क्षेत्र में एक और तनावपूर्ण बयान सामने आया है. लेबनान के संगठन हिज्बुल्ला के प्रमुख नईम कासिम ने लेबनान सरकार से अपील की है कि वह अमेरिका में इजरायल के साथ होने वाली प्रस्तावित वार्ता को रद्द कर दे. हिज्बुल्ला ने कहा कि इजरायल जैसे दुश्मन देश के साथ किसी भी तरह की बातचीत को पूरी तरह खारिज करते हैं. उन्होंने इसे रद्द करने के लिए सरकार से ऐतिहासिक और साहसिक फैसला लेने की मांग की. गौरतलब है कि हिजबुल्लाह ईरान समर्थित संगठन है और 2 मार्च से इजरायल के साथ संघर्ष में शामिल है.
रूस बनना चाहता है मध्यस्थ
ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध में अब रूस शांतिदूत की भूमिका निभाना चाहता है. पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस संबंध में ऑफर दिया था और अब विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अरागची से फोन पर बातचीत की. रूस की ओर से कहा गया कि सशस्त्र संघर्ष दोबारा न हो, यह बहुत जरूरी है. साथ ही रूस ने एक बार फिर साफ किया कि वह इस संकट को सुलझाने में हर संभव मदद करने के लिए पूरी तरह तैयार है.
अमेरिका बोला- फैसला ईरान को लेना है
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वांस ने कहा कि ईरान को परमाणु समझौते पर आगे बढ़ने के लिए खुद कदम उठाने होंगे. उन्होंने साफ किया कि पाकिस्तान में 21 घंटे चली बातचीत के बाद अमेरिका अब वहां से वापस आ रहा है और ईरान की प्रतिक्रिया पर्याप्त नहीं रही. वेंस के मुताबिक आगे की बातचीत इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान कितनी गंभीरता से बातचीत में शामिल होता है. उन्होंने कहा कि अब प्रगति की जिम्मेदारी ईरान पर है और उसे यह दिखाना होगा कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाने के लिए तैयार है.
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