$50 अरब का निवेश, टाटा, रिलायंस, अंबानी, भारती एयरटेल जैसे बड़े नाम, आखिर इस सेक्टर में क्या है खास?
Updated on
27-11-2025 05:49 PM
टाटा, रिलायंस, अडानी और भारती एयरटेल जैसे बड़े औद्योगिक घराने देश में डेटा-सेंटर के बढ़ते कारोबार में भारी निवेश कर रहे हैं। वे गीगावाट (GW) क्षमता वाले बड़े-बड़े डेटा-सेंटर बना रहे हैं, जो अगले दस साल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड कंप्यूटिंग की बढ़ती जरूरतों को पूरा करेंगे। इन कंपनियों ने अरबों डॉलर का निवेश करने का वादा किया है। इस दौड़ में नया नाम टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज का है। देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर बड़े पैमाने पर बना रही है।
टाटा ग्रुप की कंपनी TCS ने प्राइवेट इक्विटी फर्म TPG के साथ मिलकर एक मल्टी-बिलियन डॉलर का ज्वाइंट वेंचर बनाया है। इसका नाम HyperVault AI Data Centre Ltd है। इसमें TCS 18,000 करोड़ रुपये तक का निवेश करेगी। यह 1.2 GW क्षमता वाला प्लेटफॉर्म होगा, जो भारत के सभी मौजूदा डेटा-सेंटरों की कुल क्षमता के बराबर है
कितना निवेश
बाजार रिसर्च फर्मों का अनुमान है कि अगले पांच से सात साल में ग्लोबल हाइपरस्केलर्स और भारतीय कंपनियां 50 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश करेंगी। इससे भारत की डेटा-सेंटर क्षमता आज के 1 GW से बढ़कर लगभग 9 GW हो जाएगी। प्रॉपर्टी कंसल्टेंट JLL का अनुमान है कि इस दौरान 35-50 अरब डॉलर का निवेश होगा। वहीं, जेफरीज (Jefferies) का अनुमान है कि 2030 तक क्षमता 8 GW तक पहुंच जाएगी, जिसके लिए 30 अरब डॉलर के कैपिटल एक्सपेंडिचर की जरूरत होगी।
यह उछाल इसलिए आ रहा है क्योंकि भारत में डेटा की खपत बहुत तेजी से बढ़ रही है। FY17 में जहां 8 एक्साबाइट डेटा की खपत होती थी, वहीं FY25 में यह बढ़कर 229 एक्साबाइट हो गई है। JLL के अनुसार OTT प्लेटफॉर्म, ई-कॉमर्स, डिजिटल पेमेंट और AI के बढ़ते इस्तेमाल ने इस खपत को बढ़ाया है। TCS AI-रेडी डेटा-सेंटर के साथ बदल रही है। TCS के CEO का कहना है कि HyperVault ग्राहकों को प्राइवेट क्लाउड बनाने, मॉडल-एज-ए-सर्विस (MaaS) वर्कलोड चलाने और एक्टिव या पैसिव डेटा-सेंटर सुविधाएं इस्तेमाल करने के विकल्प देगा।
अंबानी-अडानी भी रेस में
अडानी ग्रुप भी इस दौड़ में पीछे नहीं है। अडानी ग्रुप ने Google के साथ मिलकर विशाखापत्तनम में 15 अरब डॉलर का AI डेटा-सेंटर बनाने की घोषणा की है। इससे पहले अडानी एंटरप्राइजेज महाराष्ट्र में डेटा-सेंटर इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए 5.9 अरब डॉलर की घोषणा कर चुकी है। अडानी ग्रुप का AdaniConneX के साथ 50-50 जेवी है, जो चेन्नई और हैदराबाद में काम कर रहा है और अब मुंबई और पुणे में विस्तार कर रहा है
देश की सबसे वैल्यूएबल कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज भी अपने AI डेटा-सेंटर नेटवर्क का विस्तार कर रही है। RIL ने पहले ही जामनगर में 1 GW का AI डेटा-सेंटर बनाने की घोषणा की थी। आंध्र प्रदेश सरकार के मुताबिक रिलायंस अगले पांच साल में विशाखापत्तनम में 1 GW का AI डेटा-सेंटर बनाने के लिए 11 अरब डॉलर का निवेश करेगी। यह प्रोजेक्ट कनाडा की ब्रुकफील्ड और अमेरिका की डिजिटल रियलिटी के साथ साझेदारी में है।
क्यों आ रही है तेजी?
जेफरीज की सितंबर की एक रिपोर्ट के अनुसार भारती एयरटेल, रिलायंस इंडस्ट्रीज और अडानीकनेक्स 2030 तक भारत की डेटा-सेंटर क्षमता का 35-40% हिस्सा मिलकर संभालेंगे। एयरटेल की Nxtra Data के पास पहले से ही 15% बाजार हिस्सेदारी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि फिलहाल भारत के डेटा-सेंटर उपभोग का 60% हिस्सा हाइपरस्केलर्स का है, जबकि BFSI (बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा) का योगदान 17% है।
क्रिसिल का अनुमान है कि भारत के डेटा-सेंटर प्लेयर्स FY26-FY28 के दौरान 55,000-60,000 करोड़ रुपये का निवेश करेंगे, जिससे क्षमता 2.3-2.5 GW तक बढ़ जाएगी। तीसरे पक्ष के ऑपरेटरों से होने वाली आय FY28 तक लगभग 20,000 करोड़ रुपये सालाना पहुंचने की उम्मीद है। यह सालाना 20-22% की मजबूत वृद्धि को दर्शाता है, क्योंकि कंपनियां और खुदरा ग्राहक तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म अपना रहे हैं।
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